आचार्य सम्मेलन का समापन पर किया सामाजिक परिवर्तन के पंच प्रण को पूरा करने का आह्वान

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बीकानेर

विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान से सम्बद्ध आदर्श शिक्षण संस्थान, बीकानेर की ओर से संचालित आदर्श विद्या मंदिरों के बीकानेर जिला आचार्य सम्मेलन 2025 का समापन को आदर्श विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक गंगाशहर में किया गया।
प्रबन्ध प्रमुख नवल किशोर सैनी ने बताया कि समापन सत्र में नन्द किशोर सोनी, प्रदीप लोढ़ा व्यवस्थापक शंकरलाल डूडी, उपस्थित रहे।

चार दिवसीय चलने वाले इस आचार्य सम्मेलन का वृत्त और धन्यवाद ज्ञापन जिला प्रवासी मूलचंद सारस्वत ने किया । चार दिवसीय इस सम्मेलन में भारत माता पूजन, गतिविधि आधारित शिक्षण एवं सभी विषयों में शिक्षण प्रशिक्षण, सुलेख, स्पोकन इंग्लिश, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, सीखने के प्रतिफल, विद्या भारती अभिनव पंचपदी सहायक सामग्री आधारित शिक्षण कार्य जिसमें विज्ञान, गणित, आंग्ल, संस्कृत, हिन्दी व सा. विज्ञान विषय व गतिविधि आधारित शिक्षण का प्रशिक्षण दिया गया। सम्मेलन में चर्चा सत्र में सहशैक्षणिक दायित्वों, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण में हमारी भूमिका, पांच आधारभूत विषयों शिक्षण प्रशिक्षण, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में सीखने के परिणाम,21 वीं सदी के कौशल आदि विषयों पर हुई।
नन्द किशोर सोनी ने कहा देशभक्ति सिर्फ विचार-विमर्श का विषय नहीं है, यह आचरण का विषय है। व्यक्ति के आचरण में जब देश हित का भाव निहित होगा, तब देशभक्ति के आचरण से ओतप्रोत समाज का निर्माण होगा और आज समाज में इसी आचरण की आवश्यकता है।
तकनीकी विश्व विद्यालय के कुल गुरु अखिल रंजन गर्ग ने बताया कि भारतीयों मूल्यों एवं भारतीय शिक्षण पद्धति के अनुसार शिक्षा विद्या भारती का मुख्य लक्ष्य है। क्योकि भारतीय शिक्षा पद्धति अनुसार हिन्दी माध्यम में अध्ययन से ही बालको में मानवीय मूल्यों का विकास सम्भव है। शिक्षा ही बच्चों में क्रियान्यवन करती है। नये नये प्रयोग कर छात्रों को शिक्षा में बताना चाहिए। छात्रों को नये नये प्रयोग के माध्यम से समझाना चाहिए एक टास्क देकर उन टास्क को हल करने को कहना चाहिए।
प्रान्त संस्कृति बोध परियोजना प्रमुख और सेवा प्रमुख किशनाराम ने समापन सत्र् में आचार्यो को सम्बोधित करते हुए कहा कि उपनिषद् आदि ग्रंथों में व्यक्तित्व के व्यक्त रूप को पाँच भागों में बांटा गया ही यह पंचकोषात्मक विकास कहलाया। अन्नमय कोष शरीर के विकास, प्राणमय कोष प्राणों, मनोमय कोष मन के विज्ञानमय कोष बुद्धि के एवं आनंदमय कोष चित्त के विकास से सम्बंधित है। विद्या भारती के विभिन्न प्रशिक्षण वर्गाे की दिनचर्या इस प्रकार की होती है इन पंचकोषात्मक विकास की अवधारणा पूर्ण हो।
आचार्य सम्मेलन के दौरान आने वाले विषयों और विद्या भारती उद्देश्य को लेकर चलने वाली पाठ्य पुस्तकों से परीक्षा का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम में विद्या मन्दिर में उत्कृष्ट कार्य करने वाले आचार्य राजेश स्वामी,करिश्मा स्वामी , चंद्रकला जाट, अशोक सारस्वत, मुरली राम शर्मा, नरसीराम लखारा,संजय मीणा ,नथू सिंह राठौड़ ,भुवनेश्वर शर्मा ,सांवर दान चारण, शंकर दान चारण, मोहन सिंह राठौड़, गायत्री चौधरी, कुशाल सिंह भाटी , नवीन सियोल ,प्रभु रांकावत, प्रियंका चावड़ा, पुखराज गोदारा , सुमन स्वामी, अश्लेषा ,चांदनी कठेरिया ,विनीता ,बसंती जोशी, भंवरलाल जाट , ब्रज रतन उपाध्याय सम्मानित किया गया। पूरे समय वर्ग को सुचारू रूप से चलाने वाले सेवा कर्मचारियों और वाहन चालकों को चांदी का सिक्का देकर सम्मानित किया गया।

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